News & Events

  1. पं. दीनदयाल उपाध्याय : एकात्म मानव वाद, अन्त्योदय एवं ग्राम विकास पर विश्वविद्यालय में दिनांक 15.09.201

    पं. दीनदयाल उपाध्याय : एकात्म मानव वाद, अन्त्योदय एवं ग्राम विकास पर विश्वविद्यालय में दिनांक 15.09.2017 को आयोजित संगोष्ठी

    केन्द्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय, सारनाथ, वाराणसी तथा पं. दीन दयाल उपाध्याय जन्मशताब्दी समारोह समिति, काशी क्षेत्र, द्वारा संयुक्त रूप से प्रख्यात दार्शनिक व सामाजिक चिंतक पं. दीन दयाल उपाध्याय जी  के अकादमिक एवं सामाजिक योगदान तथा उनके बहुआयामीय व्यक्तित्व व कृतित्व पर चर्चा करने हेतु पं. दीन दयाल उपाध्याय जी की जन्मशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में दिनांक 15 सितंबर, 2017 को प्रातः 10:00 बजे से विश्वविद्यालयके अतिश सभागार में एक दिवसीय विद्वत संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को सम्बोधित करते हुए उद्धाटन सत्र के अध्यक्ष केन्द्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय, सारनाथ, वाराणसी के कुलपति प्रो. गेशे नवांग समतेन ने कहा कि पं. दीन दयाल उपाध्याय जी का जीवन व उनका दर्शन बहुआयामीय है, जिसमें, राजनीति, समाज, दर्शन, अर्थव्यवस्था सभी पर प्राचीन भारतीय संस्कृति व परम्पराओं पर आधारित उनके मौलिक विचार समाहित हैं। संकृति व विद्या पर आधारित जीवन ही व्यक्ति व समाज तथा राष्ट्र के लिए सार्थक व उपयोगी हो सकता है, तथा पं. दीन दयाल उपाध्याय जी का जीवन व कर्म इस तथ्य का युगानुकूल प्रमाण है।  

    उद्धाटन सत्र के मुख्य अतिथि, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी के कुलपति प्रो. जी. सी. त्रिपाठी, ने पं. दीन दयाल उपाध्याय जी के जीवन दर्शन की विवेचना करते हुए कहा कि पण्डित जी ने आज की सभी चुनौतियों को रेखांकित करने का काम बहुत पहले कर दिया था। आज उनके जीवन व आदर्श से हमें प्रेरणा के साथ उन चुनौतियों से लड़ने की ताकत भी मिलती है। मुख्यअतिथि प्रो. जी. सी. त्रिपाठी ने अपना वक्तव्य देते हुए आगे कहा कि भारत का चिन्तन मौलिक है। यहाँ की परम्परा नैसर्गिक एवं प्राकृतिक है। भारत की मिट्टी से निकलने वाली सभी धर्मो की सोचशान्ति समभाव व एकता ही रही है। आज राष्ट्र के सामने जो भी आर्थिक, सामाजिक व राजनैतिक चुनौतियाँ हैं यदि हम भारतीय सांस्कृतिक व दार्शनिक विरासत के परिपेक्ष्य में उनका विश्लेषण करें तो निश्चय ही इन सभी समस्याओं के युगानुकूल समाधान के साधन प्राप्त कर सकते हैं।

    उद्धाटन सत्र के विशिष्ट अतिथिभारतीय जनता पार्टी के संगठन मंत्री श्री रत्नाकर जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि यदि हमने अपने देश को महान बनाया है तो इसे बिगाड़ने का काम भी हमने ही किया है। जिसके कारण आज उसे फिर से भारतीय संस्कृति एवं परम्परानुसार बनाने की जिम्मेदारी भी हमारी ही बनती है। भारतीय संस्कृति सकारात्मकता और स्वीकार्यता की संस्कृति रही है, हमें किसी को दुख नहीं देना है। हमारेसभी कर्म  सकारात्मक होने चाहिए यही पं दीनदयाल उपाध्याय के जीवन का केन्द्रीय संदेश था ।

    उक्त अवसर पर विशिष्ट अतिथि भदोही संसदीय क्षेत्र के सांसद माननीय वीरेन्द्र सिंह मस्त ने कहा कि हमारा भोजन, बचन सभी प्राकृतिक अधार पर होता है। कृषि हमारे देश कीजीवन धारा है, जब कि अन्य देशों में व्यवसाय को प्रमुख माना जाता है। राष्ट्र की पहली इकाई परिवार हैं। वर्तमान स्थिति में परिवार टूट रहे है।परिवार टूटने का खतरा देश को कमजोर कर रहा है, जिस के समाधान हेतु हम सभी को विचार करना होगा। आय से बचत की परम्परा हमारी एक विलक्षण प्राचीन परम्परा रही है यहाँ कर्जदार को सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता रहा है, हमें इस परम्परा का पालन करते हुए आने वाली पीढ़ियों में बचत करने की आदत को प्रोत्साहित कर उसका विकास करना चाहिए, बचत की परम्परा ही देश को स्वालम्बी बनाती है।

    राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के प्रचारक तथा विशिष्ट अतिथि श्री रामाशीष जी ने पण्डित दीन दयाल उपाध्याय जी के व्यक्तित्व पर चर्चा करते हुए कहा कि उनकी कथनी और करनी का साम्य तथा मानव मात्र के सर्वांगीण उत्थान हेतु किए गए उनके प्रयास ही उन्हें मानव से महा मानव बनाते हैं तथा हम सभी को प्रेरणा देते हैं।   

    उद्धाटन सत्र के प्रारम्भ में मुख्य अतिथि, सभा-अध्यक्ष तथा विशिष्ट अतिथियों ने दीप पज्ज्वलित करतथा पण्डित दीनदयाल उपाध्याय जी के चित्र पर माल्यार्पण और विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा संस्कृत व भोट भाषा में मंगलाचरण द्वारा कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। तत्पश्चातकेन्द्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय, सारनाथ, वाराणसी के कुलपति तथा संगोष्ठी के अध्यक्ष प्रो. गेशे नवांग समतेन जी ने खतक् तथा अंगवस्त्र प्रदान कर और विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. रणशील कुमार उपाध्याय ने स्वागत वक्तव्य द्वारा सम्मानित अतिथियों का स्वागत किया। संगोष्ठी का संचालन डॉ. राम सुधार सिंह जी ने किया। तथा धन्यवाद ज्ञापन पं. दीन दयाल उपाध्याय जन्मशताब्दी समारोह समिति के मार्गदर्शक श्री दीन दयाल पाण्डेय जी ने किया।

    उक्त अवसर पर पं. दीन दयाल उपाध्याय जन्मशताब्दी समारोह समिति के समस्त सदस्यगण, विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, शोध व अन्य विभागों के कर्मचारी गण छात्र-छात्राएं, आमंत्रित अतिथि व प्रेस व मीडिया कर्मी उपस्थित रहे।   

    उद्घाटन सत्र के उपरान्त एकात्म मानव वाद, अन्त्योदय एवं ग्राम विकास पर आयोजित तकनीकि सत्रों में  श्री रामाशीष जी ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि युद्ध में हथियार बेंच कर अमीर हुए राष्ट्रों में भोगवादी पूंजी वाद का विकास हुआ तथा मनुष्य को यंत्रवत जड़ मान कर साम्यवादी अर्थव्यवस्था का विकास हुआ। इन कारणों से पण्डित दीनदयाल जी दोनों ही व्यवस्थाओं से अलग भारतीय संस्कृति, परम्परा तथा ज्ञान पर आधारित अर्थव्यवस्था के पक्षधर थे वे कहा करते थे कि हमारी शिक्षा, राजनैतिक व्यवस्था तथा अर्थ तंत्र हमारे अपने चिंतन और परम्परा से उद्भूत होने चाहिए न कि विदेशों से आयातित।

    संगोष्ठी में प्रतिपक्ष रखते हुए के. ति. अ. वि. वि. के अम्बेडकर चेयर प्रोफेसर प्रदीप पी. गोखले ने कहा कि इन गम्भीर विषयों पर विचार करते समय हमें यह अवश्य स्पष्ट करना चाहिए कि भारतीय संस्कृति तथा प्राचीन भारतीय परम्पराओं के हमारे स्रोत क्या हैं यदि वह उपनिषदों में वर्णित उद्दात्त मानवीय मूल्यों पर आधारित हैं तो सर्वथा ग्राह्य है साथ ही हमें तत्कालीन व समसामयिक सामाजिक स्थितियों के आधार पर समीक्षक तथा साधक-बाधक भाव से ही किसी भी व्यवस्था पर विचार करना चाहिए।

    भारतीय अध्ययन केन्द्र के चेयर प्रोफेसर राकेश उपाध्याय ने कहा कि कि प्राचीन ग्रामीण भारतीय समाज उद्यमी था न कि केवल कृषक समाज। एक समय था जब गाँव एक स्वावलम्बी इकाई के रूप में स्थापित था गाँव के प्रत्येक व्यक्ति के हाथ में हुनर था काम था तथा उसका स्थानीय बाजार था। इस व्यवस्था के ध्वस्त होने के कारण आज हर व्यक्ति रोजगार के लिए महानगरों की ओर भाग रहा है और नगरों की व्यवस्था बद से बदतर होती जा रही है। ग्राम इकाई को पुनर्जीवित किए बिना कोई भी सरकार इस विकराल बेरोजगारी की समस्या को समाप्त नहीं कर सकती।

    संगोष्ठी के संयोजक तथा के. ति. अ. वि. वि. के प्रो. देवराज सिंह जी ने पण्डित दीन दयाल उपाध्याय जी द्वारा प्रतिपादित अपिरमात्रिक उत्पादन, आवश्यक उपभोग तथा वांछित बचत पर प्रश्न करते हुए मुख्य वक्ता श्री रामाशीष से जानना चाहा कि वर्तमान परिस्थितियों में उपभोग और बचत की आदर्श सीमा क्या हो सकती है।     

    के. ति. अ. वि. वि. के प्रो. वांग्चुक दोर्जे नेगी जी ने पण्डित जी के एकात्म मानव वाद पर चर्चा करते हुए कहा  कि जीवन की तात्विक समझ तथा तद्नुसार आचरण ही एकात्म मानव वाद का मूल संदेश है क्योंकि इस बात से हम सभी सहमत हैं कि भारतीय ज्ञान परम्परा के विचारों के समान उदार विचार अन्य किसी साहित्य में नहीं हैं किन्तु समाज में इन उदार मानवीय मूल्यों का अनुकरण कम ही दिखायी देता है।

    संगोष्ठी के द्वितीय सत्र में विषय प्रवर्तन करते हुए डी. ए. वी. पी. जी. कालेज के डॉ. दीना नाथ सिंह जी ने पण्डित जी के साथ हुई उनकी मुलाकातों के संस्मरण के माध्यम से उनके त्यागमय जीवन तथा उनके राजनैतिक दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पण्डित जी आजादी के बाद के भारत के स्वरूप पर भारतीय संस्कृति और परम्पराओं के आलोक में विचार कर रहे थे और उनके द्वारा प्रतिपादित राजनैतिक सिद्धान्त सर्वकालिक हैं क्योंकि वह मनुष्य व मानवता को केन्द्र में रख कर सृजित हैं।

    द्वितीय तथा तृतीय तकनीकि सत्र का अध्यक्षीय उद्बोधन करते हुए के. ति. अ. वि. वि. के प्रो. एल. एन. शास्त्री जी ने कहा कि भारतीय परम्परा में मनुष्य मात्र की स्वतंत्रता की जिस व्यापक ढंग से विवेचना की गई है वह अतुलनीय है तथा पं. दीन दयाल उपाध्याय जी भी उसी परम्परा के संवाहक हैं इनके विचारों पर चिंतन मनन और उनका आचरण निःसंदेह कल्याणकारी सिद्ध होगा।

    संगोष्टी के तीनों सत्रों में डॉ. पेमा तेनजिन, डॉ. रामजी सिंह, डॉ. अनुराग त्रिपाठी, डॉ. विवेकानन्द तिवारी सहित कई अन्य कई विद्वानों ने अपने लेख पढ़े तथा प्रश्नोत्तर चर्चा में भाग लिया।

    उपर्युक्त तकनीकि सत्रों में प्रो. बी. आर. त्रिपाठी, डॉ. बनारसी लाल, डॉ. वन्दना झा, डॉ. उमेश चन्द्र सिंह, डॉ. कौशलेश सिंह, डॉ. ए. के. राय सहित अनेक विद्वान उपस्थित रहे।

    विश्वविद्यालय के प्रलेखन अधिकारी श्री राजेश कुमार मिश्र ने संगोष्ठी के रिपोर्टियर के दायित्व का निर्वहन किया तथा संगोष्टी के संयोजक प्रो. देवराज सिंह जी ने समापन वक्तव्य देकर धन्यवाद ज्ञापित किया। 

  2. Seven Days Short term course on Indian Epistemology (Buddhism, Jainism, Carvaka)

    Seven Days Short term course on Indian Epistemology (Buddhism, Jainism, Carvaka)

    12.09.2017

    CUTS, Sarnath, Varanasi firmly believes that the debate, discussion and sharing of knowledge among National and International scholars of particular subject domain and across subject domains is a powerful mean to preserve and expand the every knowledge system. The University regularly organizes formal and informal academic exchange program for the benefit of national as well as international scholars and students. In continuation to this noble tradition of academic sharing, on request of scholars of Department of General Pedagogy, Bayreuth University, Germany Prof. P P Gokhale, (Dr. B.R.A. Research Professor of the University) designed a specific short term course on Indian Epistemology in Buddhism, Jainism and Carvaka philosophies.

     

    A seven days short term course on Indian Epistemology (Buddhism, Jainism, Carvaka) was organized from 4th to 11th September 2017 from 10:30 AM to 5:00 PM daily, excluding 10th September 2017 Sunday. Sixteen outstation participants including the scholars of Bayreuth University, Germany and some other scholars of different institutions of Germany, scholars from different parts of India and the interested faculty members, research scholars and students of the University attended the course.

     

    Course instructor Prof. Pradeep P. Gokhale deliberated on the topics - Basic Vocabulary of Indian Epistemology and the Nyaya Classification of Pramanas; Buddhist Epistemology I: Nagarjuna; Buddhist Epistemology II: Dinnaga and Dharmakirti; Jaina Theory of Knowledge: The Transition from Early to Classical Jaina Epistemology; Jaina Classification of Pramanas; Carvaka Epistemology I: Scepticism and Extreme Empiricism; Carvaka Epistemology II: Mitigated Empiricism: Positivist and common Sense Empiricism.

     

    The seven days lecture program was well appreciated by all the participants. This intensive program not only expanded the understanding of the participants on above said philosophical concepts but also enabled them to develop the insight on the fundamentals of Indian Epistemology.

  3. ACADEMIC EXCHANGE PROGRAM BETWEEN CUTS AND UNIVERSITY OF WASHINGTON-BOTHELL

    ACADEMIC EXCHANGE PROGRAM BETWEEN CUTS AND THE GROUP OF STUDENTS LED BY PROF. GREG TUKE OF UNIVERSITY OF WASHINGTON-BOTHELL

    06.09.2017

    In continuation to the Social Media for Global Change program between scholars and students of CUTS and other western Universities, a group of students led by Prof. Greg Tuke (University of Washington-Bothell) visited the University from 2-6 September 2017. On their request Prof. L. N. Shastri, Prof. Wangchuk Dorje Negi, Prof. Jampa Samten (Tibetan History), Dr. Tashi Tsering (S), Dr karma Sonam Palmo delivered lectures to the visiting students on various aspects of Buddhism and contemporary world to sharpen their understanding of core concepts of Buddhism such as Interdependent Origination, Four Noble truths, Essence of Buddhist Practice, Women in Buddhism and other areas like History of CUTS and history of Buddhism in Tibet etc. A meeting with the, CUTS students who regularly participating in the Social Media for Global Change program was also organized with the visiting students to exchange and share their knowledge and experiences on various topics on global issues.

    A group of selected students of CUTS led by Dr Tashi Tsering (S) is regularly participating in the Social Media for Global Change program online with the students of Washington University. Keeping in view the importance of such academic exercise among students and scholars of different countries having entirely different social, cultural and academic background Prof. Greg Tuke visited the CUTS with a group of his selected students. The program provided excellent opportunity for the scholars and students of CUTS to understand about the state and status of western students and also for visiting students to learn and experience the academic ambience of CUTS in real sense.

    At last day of the program Vice Chancellor of the University Prof Geshe Ngwang Samten given a lecture and discussed on the concept of mind and mind training in Buddhism in the committee room of the Kamalsheel Bhavan.         

    The students group visited the Shantarakshita Library and other academic departments of the University. A visit to Dhammekh Stupa Sarnath was also organized to narrate the history of Buddhism in the Buddhist Sites at Sarnath.          

  4. Workshop on Secular Ethics

    Workshop on Secular Ethics

    23.08.2017

    Central University of Tibetan Studies (CUTS) Sarnath, Varanasi and Ayur Gyan Nyas, Meerut jointly organized a three-day workshop on “Secular Ethics” from 20th to 22nd August 2017, the workshop was concluded yesterday with desired outcome. Ayur Gyan Nyas was established in the year 2014 with blessings of H.H. The Dalai Lama with a view to make contribution to education by cultivating universal and secular ethics and moral values. Ayur Gyan Nyas is working to promote the basic human values in the society; the Nyas has its offices at Jhansi and Meerut cities of U.P.

    The workshop was organized to give a final shape to the first part of the teacher’s workbook, which is to be provided at the time of training the school teachers. The remaining workbooks are being compiled and designed by a team of scholars. The workshop was attended by the selected members of the Ayur Gyan Nyas namely Prof. Avinash Chandra Pandey, Trustee and Professor of Physics at Allahabad University and former V.C. of Bundelkhand University, Ms. Deepti Gulati, Trustee and General Secretary, Ms. Asheema Singh, Trustee, Ms. Seeksha Gulati, Consultant, Mr. Todd Moore, Consultant, Mr. Pritom Saikia, Research Analyst and two interns who are engaged with this project from Nalanda University, Rajgir and Delhi Uinversity. The workshop was presided over by Prof. Geshe Ngawang Samten, the Hon’ble Vice Chancellor of Central University of Tibetan Studies, Sarnath, Varanasi.

    The Ayurgyan Nyas has planned to launch the Course on Secular Ethics in the next few months at Meerut (U.P.).

  5. Golden Jubilee Celebration of CUTS

    Central University of Tibetan Studies

    (Deemed University)

    Sarnath, Varanasi 221007

     

    21st August 2017

     

    Golden Jubilee Celebration of CUTS

    The Central University of Tibetan Studies was formally inaugurated by His Holiness The Dalai Lama on 1st January 1968 in the premises of Sampurnananda Sanskrit Vishwavidyalaya, Varanasi. With the blessings and guidance of His Holiness The Dalai Lama, generous support of Government of India and contributions of many scholars, dignitaries and well-wishers across the globe, the CUTS is approaching to complete its successful journey of meaningful fifty years of its establishment on 1st January 2018. Depending on the convenience of His Holiness The Dalai Lama, who has already consented to grace the occasion, the Central University of Tibetan Studies has planned to commemorate its landmark golden jubilee anniversary either at the very end of December 2017 or at the very beginning of the January 2018. A series of programs will be organized through-out the year to commemorate the glorious fifty years starting with the International Conference on Mind in the Indian Philosophical Thoughts and Modern Science

    Alumni, who have spent the formative period of their academic life with many cherished memories are cordially invited to participate the occasion. The University will arrange the local hospitality for them. The Alumni Association of the University is assigned to make all necessary arrangement in this regard. Therefore, those, who are interested to participate, may contact the Alumni Association of the University on alumnicuts67@gmail.com for further information.

    Prof. Geshe Ngawang Samten

    Vice-Chancellor

    CUTS, Sarnath, Varanasi

     

     

     

  6. सद्भावना दिवस 2017

    सद्भावना दिवस 2017

    18.08.2017

    युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार छात्र छात्राओं सहित विश्वविद्यालय परिवार के समस्त सदस्य आज दिनांक 18.08.2017 को अपराह्न एक बजकर पंद्रह मिनट पर विश्वविद्यालय के अतिश सभागार में सद्भावना प्रतिज्ञा हेतु एकत्र हुए। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ रणशील कुमार उपाध्याय ने भारत सरकार के सद्भावना प्रतिज्ञा कार्यक्रम का विवरण प्रस्तुत कर कुलपति प्रो. गेशे नवांग समतेन जी को उपस्थित समस्त सदस्यों को सद्भावना प्रतिज्ञा दिलाने हेतु आमंत्रित किया। उक्त अवसर पर सद्भावना विषयक विचार व्यक्त करते हुए माननीय कुलपति महोदय ने कहा कि वस्तुतः सद्भावना हमारे व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक और लोकतांत्रिक राष्ट्र जीवन का एक महत्वपूर्ण आधार स्तम्भ है। किसी के प्रति सद्भावपूर्ण व्यवहार न केवल उस व्यक्ति को आनन्दित करता है वरन हमें भी सन्तोष प्रदान करता है और साथ ही एक सकारात्मक वातावरण का सृजन भी करता है। भारत देश की सर्वसमावेशी संस्कृति देशवासियों के सद्भावपूर्ण व्यवहार के कारण ही विकसित हुयी है। कुछ गिने चुने लोगों को छोड़कर भारतवासी आज भी सद्भावना की इस महान संस्कृति का जिस तरह से पालन कर रहे है वह अन्य देशों में कम ही दिखाई पड़ता है। भारत सरकार के समस्त कर्मचारियों को सद्भावना प्रतिज्ञा दिलाने की यह पहल निःसंदेह स्वागत योग्य तथा सर्वथा अनुकरणीय है तथा इससे कार्यालयों तथा समाज में सद्भावना का वातावरण विकसित करने में अवश्य ही मदद मिलेगी। किन्तु साथ ही हमें यह भी स्मरण रखना चाहिए कि यह प्रतिज्ञा केवल आज के लिए नहीं है हमें अपने दैनिक जीवन में सद्भावपूर्ण आचरण करके इस आवश्यक मानवीय गुण का निरन्तर विकास करना चाहिए यह हमारे अपने लिए भी उतना ही आवश्यक है जितना कि हमारे सम्पर्क में आने वाले अन्य सभी के लिए। सद्भावना सहित अन्य अनेक परम्परागत मानवीय विद्याओं के अध्ययन अध्यापन का केन्द्र होने के कारण इस भाव का आचरण कर इसके प्रसार हेतु हम सभी की जिम्मेदारी अन्य सरकारी संस्थाओं की अपेक्षा अधिक है इसका हमें सदैव स्मरण रखना चाहिए।   

    उपर्युक्त संक्षिप्त उद्बोधन के उपरान्त माननीय कुलपति महेदय ने अध्यापकों, कर्मचारियों, छात्र, छात्राओं सहित विश्वविद्यालय परिवार के समस्त उपस्थित सदस्यों को सद्भावना प्रतिज्ञा दिलाकर कार्यक्रम की समाप्ति की घोषणा की। 

                  

  7. Independence Day Celebration at CUTS Sarnath, Varanasi

    Independence Day Celebration at CUTS Sarnath, Varanasi

     

    15th August 2017

     

    Today at 9:00 AM the entire CUTS family gathered in the lawn in-front of Shantarakshita Library of the University to commemorate the ideas and ideals of Independence struggle of the country and to celebrate the 71st Independence day of the country.

    Hon’ble Vice Chancellor Prof. Geshe Ngawang Samten hoisted the national flag followed by mass recitation of the national anthem. After saluting the national flag Hon’ble V.C. congratulated every Indian and venerated thousands of those who have made contribution to materialize independence of India. He further said that India’s independence has made great impact on entire Asia as well as to the rest of the world.

    In his address on the occasion Hon’ble V.C. mentioned the three important meetings and conferences he had attended in last 10 days as they are all relevant to this day of Indian Independence since they were on religious harmony, educations system and secular ethics in the context of India. Mentioning the first program, Interfaith Dialogue for Peace, Harmony and Security organized at Yangon, Myanmar collectively by the India, Myanmar and Japan, he narrated in detail the ancient Indian tradition of harmonious co-existence of all the religious and philosophical traditions originated in India and those came from out side. The Indian tradition of respecting diversity, is certainly an example for the rest of the world. The religious heads and scholars at the dialogue resolved to meet on regular basis and work together for harmony and peace in the society.  

    The second program he attended was the 10th edition of the World Education Summit at New Delhi which was attended by educationists, education policy makers and educators, where they shared the best practices and discussed the areas which require urgent attention for the betterment of education sector of the country.

    Third program was organized by the Tata Institute of Social Science at Mumbai, to launch the course on Secular Ethics followed by discussion among educationist and scholars. H. H. The Dalai Lama launched the program and highlighted in his address the necessity of incorporating ethics in the modern education system. Education on merely external world is not sufficient without paying attention on the inner world which is the actual source of our suffering and happiness.

    Highlighting the need of secular ethics in the modern world, Hon’ble V.C. mentioned the five important components of the secular ethics which are: ethics of restrain, ethics of virtue, ethics of compassion, discernment and universal responsibility, which are the essential soft skills, which everyone must inculcate in order to be a better and a happier person and bring peace in the society. He elaborated each of the components.

    He emphasised the need of religious harmony, better education system and education of ethics for every individual person.

    Finally, he expressed his wish for the fast material development of the great nation of India coupled with the spiritual values.

  8. Heartfelt Condolence to Tenzin Choeying

    The entire CUTS family is in deep mourn since they received the message of Tenzin Choeying’s passing away at Safdarjang Hospital, Delhi on 22nd July 2017 at 4:50 PM (IST)

    Late Tenzin Choeying was a student of PM 2nd year of the university, who immolated himself on 14th July 2017 morning in the boy’s hostel, Padmasambhava, for the cause of Tibet and preservation of its culture and language as he had written in his note addressed to his friend.

    Mr Choeying was immediately recused and rushed to the Heritage Hospital Varanasi one of the best hospitals in Varanasi. After seeing his condition, internationally renoumd plastic surgeon, Dr Bhattacharya of BHU was consulted and on his advice, Mr Choeying was airlifted to burns causality ward of Safdarjang Hospital, Delhi on 20th July 2017. All possible attempts were made to save the life of Mr Choeying, but unfortunately he finally sucumbed to burn on 22nd July 2017 at 4:50 PM in the ICU. After receiving his body from the hospital, it was taken to the Samyeling Tibetan Refugy colony in Delhi, where people had paid their final respects and said prayers for him. His body with representatives from various organisations left Delhi around noon today for Dharamasala where the cremation will be held on 26th July with prayers.

    The CUTS family was continuously praying for the life of Mr Choeying since 14th July 2017, and Vice Chancellor and CUTS administration were continuously monitoring the situations. When his situation aggravated, the university sent the Dean of the Medical Department, Prof. Lobsang Tenzin, and the Dean of the Students Welfare, Ven. Geshe Lungrig Loden Wangchuk and a staff. The reprepentatives of the University have joined the group leaving for Dharamsala to attend the cremation.

    Just after receiving the news of his passing away, a prayer was organized in the University in the evening.

    On 24th July 2017 a condolence meeting was addressed by the Vice Chancellor of CUTS. Addressing the condolence assembly the vice chancellor said that there are three points to which this event draws our attention: Firstly, Mr. Tenzin Choeying with strong motivation for the cause of nation and and the preservation of its culture sacrificed his life. It is a message for all Tibetans, elders and youngsters, to unite and make more effort for the preservation of Tibetan culture and for the cause of the nation. Secondly, we should pray for him so that he may be born again to make contributions for the nation and its culture and enter into the spiritual path and eventualy attain Buddhahood. Thirdly, Tibet’s cause is not just for the six million Tibetan people. Rather, it is a cause for the entire Asia and the world at large. For these gigantic causes, active involvement of even millions of people would be less. Therefore, he appealed to the Tibetan people inside and outside Tibet to actively envolve for the cause of Tibet and for the preservation of its culture which is a precious treausure for the entire humanity.

    The Univsrsity is closed for today to pay respect to him. After the condolence meeting, the CUTS family had convened a special condolence prayer at 2.30 PM on 24th July for the deceased and for the consolation of his family members. The CUTS will perform weekly prayer for the next seven weeks.

  9. 5 Days Intensive Workshop on Adobe Indesign

    Date: 24th April 2017 - 28th April 2017

    Instructor : Tibetan IT Expertise Geshe Lobsang Monlam


    Know More about Adobe Indesign

  10. Swachhta Pakhwada 2017

    Click here to View

Notice

  • Walk-in Interview for A Guest Faculty
    Uploaded on: 2017-09-22

    Walk-in Interview for A Guest Faculty


    Click here to download the notice

  • Time Table For Academic Session 2017 - 2018
    Uploaded on: 2017-09-19

    Time Table For Academic Session 2017 - 2018


    Click here to download

  • एक दिवसीय विद्वत संगोष्ठी
    Uploaded on: 2017-09-14

    एक दिवसीय विद्वत संगोष्ठी


     

    केन्द्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय

    सारनाथ, वाराणसी

                                                                                                           

    सूचना

    दिनांक – 14.09.2017

     

    केन्द्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय, सारनाथ, वाराणसी तथा पं. दीन दयाल उपाध्याय जन्मशताब्दी समारोह समिति, काशी क्षेत्र, संयुक्त रूप से प्रख्यात दार्शनिक व सामाजिक चिंतक पं. दीन दयाल उपाध्याय जी  के अकादमिक एवं सामाजिक योगदान तथा उनके बहुआयामीय व्यक्तित्व व कृतित्व पर चर्चा करने हेतु पं. दीन दयाल उपाध्याय जी की जन्मशताब्दी की पूर्व संध्या पर दिनांक 15 सितंबर, 2017 को प्रातः 10:00 बजे से केन्द्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय, सारनाथ, वाराणसी के अतिश सभागार में एक दिवसीय विद्वत संगोष्ठी आयोजित करने जा रहे हैं।

     

    काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी के कुलपति प्रो. जी. सी. त्रिपाठी, संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि होंगे तथा केन्द्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय, सारनाथ, वाराणसी के कुलपति प्रो. गेशे नवांग समतेन संगोष्ठी की अध्यक्षता करेंगे। पं. दीन दयाल उपाध्याय जी द्वारा प्रवर्तित एकात्म मानववाद, अन्त्योदय तथा ग्रामविकास की अवधारणा विषयों पर संगोष्ठी के तीन तकनीकि सत्रों में लब्ध प्रतिष्ठित विद्वान अपने शोध लेखों का वाचन कर चर्चा करेंगे ।

      

    संगोष्ठी के उद्घाटन में शैक्षिक, शोध अनुभाग के सदस्यों व छात्र-छात्राओं की उपस्थिति तथा तकनीकि सत्रों में शैक्षिक, शोध अनुभाग के सदस्यगण, पी.एच.डी., एम. फिल. व आचार्य के छात्रों की उपस्थिति प्रार्थित है।

     

     

    प्रो. देवराज सिंह       

    अध्यक्ष, आयोजन समिति

     

     

  • Notification for Examination Form
    Uploaded on: 2017-08-04

    Notification for Examination Form


    Notification for Examination Form

  • Notice for Investment of Surplus Funds
    Uploaded on: 2017-07-13

    Notice for Investment of Surplus Funds


    Download Notice Here.

    Proforma for Quoting Rate of Inerest

  • Notice on Reconstituted Sexual Harassment Committee
    Uploaded on: 2017-05-15

    Notice on Reconstituted Sexual Harassment Committee


    Click Here to download the notice

  • Admission Notification for 2017-2018
    Uploaded on: 2017-04-25

  • Debtris Unserviceable Items Auction Notice 2017
    Uploaded on: 2017-04-13

    Debtris Unserviceable Items Auction Notice 2017


    Debtris/Unserviceable Items Auction Notice 2017

Tender